रविवार, 14 फ़रवरी 2016

लड़कियों का देश

लड़कियाँ हमारे देश का गौरव हैं। हमें लड़कियों का सम्मान करना चाहिए। कहते है, लड़कियाँ हमारे देश-हमारी पीढ़ी को आगे बढ़ाती हैं। पर सवाल है कि क्या सच में ऐसा है? आज हमारे देश मे सबसे ज्यादा असुरक्षित लड़कियाँ हैं। हर तरह से लड़कियाँ ही प्रताड़ित होती है। फिर चाहे वो बलात्कार के रूप में हो, या फिर जन्म से पहले लड़कियों को गर्भ में ही मारने के रूप में। आज हमारे समाज मे लड़कियों को जन्म से पहले ही मारना कम हो गया है लेकिन अभी भी ये जड़ से खत्म नहीं हुआ है। जिस घर में बेटा होता है, उस घर के लोग बहुत ज्यादा ही खुश हो जाते हैं कि उनके वंश को बढ़ाने वाला आ गया है, लेकिन ऐसे बहुत कम ही घर है, जहाँ बेटी के जन्म की खुशियाँ मनाई जाती हो। पर जो लोग ये सोचते है कि अगर हमारे घर में लड़का होगा तभी हमारा वंश आगे बढ़ेगा लेकिन वो ये क्यों नहीं सोचते हैं कि क्या सिर्फ लड़के के होने से ही उनका वंश आगे बढ़ेगा? सच तो ये है कि वंश लड़कों से नहीं बल्कि लड़कियों से आगे बढ़ता है। जिस घर मे बेटा होता है वहाँ तो केवल उस घर का नाम आगे बढ़ता है लेकिन जिस घर मे बेटी होती है, वहाँ तो दो घरों का वंश बढ़ता है। तभी हमारे बुजुर्गों ने कहा है कि लड़कियाँ दो कुलों को नाम रोशन करती हैं। 

लेकिन फिर भी लड़कियों को बोझ समझा जाता है। उन्हे एक अहसास, एक सम्मान की तरह नहीं बल्कि एक ज़िम्मेदारी के रूप मे लिया जाता है। कि जितनी जल्दी हम लड़की की शादी कर दें उतनी जल्दी ही हमारे सर का बोझ कम हो। आज के समय में लड़कियाँ लड़कों से किसी भी चीज मे भी कम नहीं है। कोई ऐसा काम नहीं है जो लड़कियां न कर सकें। लेकिन फिर भी हमारे समाज मे वो सुरक्षित नहीं हैं। आए दिन अखबारों में सबसे ज्यादा यही न्यूज़ रहती है कि आज इस लड़की के साथ बलात्कार हुआ कल किसी और लड़की के साथ। क्या हमारे समाज मे लड़कियों का कोई अस्तित्व नहीं है? क्या वो अपने ही घर में, अपने ही गाँव, अपने ही शहर मे बिना किसी डर के नहीं रह सकतीं? क्या उन्हे समाज मे खुल के जीने का हक़ नहीं है? आज हमारे समाज मे बलात्कार इतना बढ़ गया है कि हवस के दरिंदे छोटी-छोटी बच्चियों को भी नहीं छोडते हैं। क्या उन्हे उनके परिवार वालों ने लड़कियों का सम्मान करना उन्हे नहीं सिखाया है? क्या उनके घर मे लड़कियाँ नहीं होती है? क्या उन्हें ऐसा करते हुये ज़रा-सी भी शरम नहीं आती है? क्या उनकी इंसानियत मर गयी है? कहीं ऐसा ना हो कि इस बढ़ती हुयी गंदगी से लोग बेटियों को जन्म देना ही ना बंद कर दें? अगर आज हमारे देश मे लड़कियाँ असुरक्षित हैं तो उसका एक महत्वपूर्ण कारण कहीं-न-कहीं हम भी हैं कि हमने हमारे बेटों को अच्छे संस्कार नहीं दिये। क्योंकि ऐसे हैवान कहीं बाहर के देश से नहीं आते हैं बल्कि हमारे ही देश में जन्मे हमारे ही समाज मे पले-बड़े हमारे ही आस-पास के लोग होते हैं, जो अपने हैवानियत से हमारे देश हमारे समाज को गंदा कर रहे हैं। ऐसे हैवानों को तो कैद की सजा नहीं बल्कि ऐसी सजा देनी चाहिए की फिर कभी वो ऐसी हैवानियत करने के लायक ही न बचे। ऐसे हवस के भूखों को तो नपुंसक बना देना चाहिए और ऐसी सजा देनी चाहिए की उनकी रूह भी काँप जाए और कोई भी हैवान ऐसा करने का कभी सोचे भी न।

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